Paheliyan  471 se 480 tak

एक टांग से खड़ा हुआ हूँ, एक जगह पर अड़ा हुआ हूँ। भरी छाता मैंने है ताना, सब जीवों को देता हूँ खाना। उत्तर – पेड़

गोल – गोल चीजे बहुतेरी, सर्वश्रेष्ठ हूँ, मानों मेरी, इसको तुम समझो न गप, मैं रूठूँ तो दुनिया ठप। उत्तर – पहिया

एक टांग पर खड़ी रहूं मैं, एक जगह पर अड़ी रहूं मैं , अंधियारे को दूर भगाऊं, धीरे – धीरे गलती जाऊं। उत्तर – मोमबत्ती

एक तरुवर का फल है तर, पहले नारी, बाद में नर। वा फल की यह देखो चाल, बाहर खाल औ भीतर बाल। उत्तर – भुरटा

एक तोप है दोनली, जाड़े में जलधार चली। उत्तर – नाक

एक थाल मोती से भरा, सबके सिर पर औंधा धरा , चारों ओर वह थाल फिरे, मोती उससे एक न गिरे। उत्तर – आसमान और तारे

एक बर्तन में छिहत्तर छेद, पेट में पचे नाहि कोई भेद। उत्तर – छलनी

एक नगरी में चौंसठ घर, दो पास बैठí