Paheliyan  571 se 580 tak

तीसी जैसा रूप है मेरा, रक्त पीऊं भर पेट। धीरे – धीरे पास में जाऊं, जो बिस्तर  लेट। उत्तर – खटमल

तेल पिया, रात में जिया, तुम्हें इतना – सा इशारा किया। उत्तर – दिया

दुनियॉं भर की करता सैर, नहीं भूमि पर पड़ता पैर, रात जागता, दिन सोता, एक – सा रूप कभी न होता। उत्तर – चंद्रमा

काया छोटी, मुछ बड़ी, रात हुई, तो चीख पड़ी। उत्तर – झींगुर

पांव नहीं, पर दुनियां घूमूं, स्वामी का पांव सदा चूमूँ। उत्तर – जूता

देखन में हूँ गाँठ – गठीला, मुंह में डाल कहो रसीला, मौके पे लाठी बन जाऊं, गुड़ – चीनी का बाप कहउँ। उत्तर – गन्ना

उजली धरती, काला बीज, ज्ञान बाँटने वाली चीज। उत्तर – किताब