Paheliyan  641 se 650 tak

इधर गई, उधर गई, और न जाने किधर गई। उत्तर – सड़क

सेहरा बांधा पांव में, शाम को खिलते साथी, उसके पेट में अगन लगी, गले में डाल दी फांसी। उत्तर – कंदील

बिन दाना – पानी का खाना , एक राह से आना – जाना, मंजिल आ कर न पहचाने, तीनों सगे, पर रहे बेगाने। उत्तर – घड़ी की सुइयां

एक बड़ी एक छोटी नार, एक ही नाम धरा करतार, छोटी ज्यादा महँगी आए, मुंह को तनिक में तर कर जाए। उत्तर – इलायची

सिर में जटा, देह पर कपड़ा, नए गुरु का चेला है। छील छाल के हाथ में दिया, यह भी एक पहला है। उत्तर – भुटटा

छिप देखी अमिन ने छोटी – सी वो कली, छत, दिवार पर पलती , मारे को धीरे चली। उत्तर – छिपकली

मालिक संग जम्मू गई, और कभी गई कलकत्ता। सोलह – सोलह पेड़ पर, दिखे सिर्फ एक पत्ता। उत्तर – दांत और जीभ