Paheliyan  701 se 710 tak

बीच में ले ताली बजी, निकल आग से थाल सजी। उत्तर – तंदूरी रोटी

मुंह मोड़ छिपे पेट में, पर वो कछुआ नाहिं। बांटन से पहले काटन को, हर घर राखत जाहिं। उत्तर – चाकू

एक चीज सस्ते में आए, गर्दन खातिर नाम कमाए। राखै पानी, खुद ना पिए, बड़ा सुख गर्मी में दिए। उत्तर – सुराही

एक नार के मध्य में किलि, बिन किली वो रहती दिली। ना लहंगा, ना पहने साड़ी, वस्त्र के बिच रहे उघाड़ी। उत्तर – कैची

धूप लगे सूखे नहीं, छांव लगे कुम्हलाए। उसकी बात लगे निराली, हवा लगे, तो मर जाय। उत्तर – पसीना

सारे जग की बात सुनाता, मैं लोंगो का मन बहलाता। बिजली से या खाऊं सेल, ऐंठो कान, तब देखो खेल। उत्तर – रेडियो या ट्रांजिस्टर

तन फूलो – सा गोल – गोल, बने नहीं कभी अधूरी। पहले एक, फिर होय दो, आकृति तब होय पूरी। उत्तर – पूरी

आते ही आधा नाम बताऊं, è