Paheliyan  721 se 730 tak

बिन हड्डी का नन्हा राक्षस, आए जब घिर आती रात। गुन करता मस्त – मस्त हो, देख के मौका करता घात। उत्तर – मच्छर

बिन बरखा दिखे कभी, ऐसा कभी नहीं हुआ। रंग तेरे बहुतेरे हैं, पर  हाय कभी नहीं छुआ। उत्तर – इंद्रघनुष

मखमल की थैली में, हाय – हाय के बीच। उत्तर – मिर्च

बच्चो, मैं हूँ ऐसा नर, मेरे धड़ में मेरा सर। उत्तर – कछुआ

बिन पानी रूप न ले, पानी से गल जाय, आग लगाकर फूंक दे, अजर – अमर हो जाय। उत्तर – ईट

बिन तेरे मिले नहीं, रोज सुबह सन्देश। एक जगह, पर चलत है, दैत्य – सा तुम्हारा वेश। उत्तर – छपाई मशीन

पर बाजु नाहीं रखे, ना जल पिए, ना खाना चखे, हाड़ – मांस न उसके पास, पल में पींगें भरे अकास। उत्तर – पतंग