Paheliyan  731 se 740 tak

ढाई आखर नाम में, एक शहर कहलाय। जग प्रसिद्ध हर काल में, शासक बैठा पाय। उत्तर – दिल्ली

एक से कभी उपजे नहीं, मिल के दो उपजाई। जर जोरू, जमीन के, ये घातक हो भाई। उत्तर – लड़ाई

सिर पर बर्तन, मुंह में लड़की, चीज है एक अजूबा। फूंके जब तो आंसू टपके, चाहे हो वे महबूबा। उत्तर – चूल्हा

मटर से छोटा, रंग है काला, जो न बुझे, वो बंदर का साला। उत्तर – काली मिर्च

रोज सवेरे खाने जाते, मिलूं मगर देख न पाते। उत्तर – हवा

पीटो – पीटो चिल्लाओ, जब उलट देत है मुझको। सिर चढ़ी बनी रहूं, धूप से बचाऊं तुझको। उत्तर – टोपी

पर वाला पीला दिखूं, एक इंच का जीव। चटक चुम्मा लेत तो, गहरी पीड़ा दीव। उत्तर – ततैया

लाल – पीला मैं द